तक़लीद का सबूत आयाते क़ुरआनिया और अह़ादीस व तफ़्सीर से
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*🥀 तक़लीद का सबूत आयाते क़ुरआनिया और अह़ादीस व तफ़्सीर से 🥀*
🔛 बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
तर्जमा: हमको सीधा रास्ता चला उनका रास्ता जिन पर तू ने एहसान किया।
*📚 सूरह फ़ातिहा' आयत 5/6*
कहिए सीधे रास्ते के बाद ये कहने की क्या ज़रूरत है उनके जिन पर तू ने एहसान किया।
इसका साफ़ मतलब ये है कि सीधे रास्ते को नहीं समझ सकोगे उनके नक़्शे क़दम पर चलो जिन पर मेरा एहसान है ये तक़लीद की तरफ खुला इशारा है।
हजरत इमामे आ’ज़म अबू ह़नीफ़ा रहमतुल्लाहि तआ़ला अ़लैहि' भी उन लोगों में से हैं जिन पर ख़ुदा ने बे पनाह एहसान फ़रमाया।
शैखैन ने हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' से और तबरानी ने हज़रत इब्ने मस्ऊ़द रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' से रिवायत की है की रसूलुल्लाह ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया है *لو کان العلم عندالشریا* और अबू नईम की रिवायत में है या’नी ईमान या इल्म अगर सुरय्या सितारे पर भी होगा तो अहले फारस में से एक शख़्स उसको ले आएगा।
*📚 मुस्नद इमाम अहमद बिन हम्बल' हिस्सा-2, पेज़ 297*
*📚 बुख़ारी शरीफ़' हिस्सा-2, किताबुत तफ़सीर बाब कौले व आख़रीन मिन्हुम म, पेज़ 727*
☝️और अल्फ़ाज़ मुस्नद अहमद बिन हम्बल के हैं...
मुहददेसीन की एक जमाअ़त का ख़्याल इस हदीस में हज़रत इमाम आ’ज़म आबू ह़नीफ़ा रहमतुल्लाहि तआ़ला अ़लैहि' की तरफ़ इशारा है
क्योंकि आप नस्ल के एतिबार से फारसी थे और अहले फारस में आपकी मिस्ल कोई आलिम व फक़ीह न गुज़रा।
और इमाम आ’ज़म अबु ह़नीफ़ा रहमतुल्लाहि तआ़ला अ़लैहि' की शाने मक़ाम व मर्तबा तो ये है कि हज़रत इमाम शाफेई रहमतुल्लाहि अ़लैहि' भी जब उनके मज़ार शरीफ़ पर हाजरी देने आए तो वहाँ इमाम साहब के मस्लक के मुताबिक़ नमाज़ अदा फ़रमाई बिस्मिल्लाह आहिस्ता पढ़ी, रफअ़ यदैन न किया, फज्र की नमाज़ में दुआए क़नूत न पढ़ी।
*📚 खैरूतुल हिसान लिल इमाम इब्ने हजर मक्की, अल इन्साफ़ लिलशाह वली मोहदिसे देहलवी' पेज़ 28*
इस ह़िकायत से ये भी मा’लूम हुआ के चारों इमामों में बावजूद फुरोई मसाईल में इज्तेहादी एख्तेलाफ के एक दूसरे से नफ़रत न थी बल्के अदब व एहतेराम किया करते थे और बेशक चारों मस्लक हक़ हैं।
तर्जमा: इताअ़त करो अल्लाह की और इताअत करो रसूल की और अपने में से हुक्म वालों की।
*📚 सूर: निसा' आयत_59*
ग़ैर-मुक़ल्लिदों! बताओ कि ये अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त और उसके रसूल ﷺ की इताअ़त के बाद ये किसी और की इताअ़त का हुक्म क़ुरआने करीम में क्यों है
आपका वोह क़ौल कहाँ गया के हमें क़ुरआन व हदीस के एलावा और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है।
शायद आप ये कहें के हुक्म वालों से सलातीने इस्लाम मुराद हैं।
तो वाज़ेह रहे की सलातीन का मर्तबा अहले इ़ल्म के बाद है क्योंकि सुल्तान भी उलमा से पूछ कर ही फैसले करेगा और उनके हुक्म पर उसे भी चलना पड़ेगा।
तभी वह इस्लाम का सुल्तान कहलाएगा और सुल्तान भी तो न ख़ुदा है न रसूल वह खुदा और रसूल के एलावा ही तो है या वह आपका ख़ुदा व रसूल है “
तर्जमा: ऐ लोगो! इल्म वालों से पूछो अगर तुम न जानते हो।
*📚 सूर: नहल' आयत_43*
इस आयत में इ़ल्म वालों की तरफ़ लोगों की रग़बत दिलाई गई, और उनकी तक़लीद का हुक्म दिया गया है और हज़रत इमाम आ’ज़म अबु ह़नीफ़ा रहमतुल्लाहि तआ़ला अ़लैहि' से बढ़कर इ़ल्म वाला उनके बाद कोई पैदा नहीं हुआ।
तर्जमा: मेरी तरफ़ रूजुअ लाने वालों की इत्तेबा करो।
*📚 सूर: लुक़मान' आयत_15*
तर्जमा: तो क्यों न होगा कि उनके हर गिरोह में से एक जमाअ़त निकले के दीन की समझ हासिल करें और वापस आकर अपनी क़ौम को डर सुनाएँ इस उम्मीद पर के वोह बचें।
*📚 सूर: तौबा' आयत_122*
इस आयत से मालूम हुआ के हर शख़्स पर मुज्ताहिद बनना जरूरी नहीं बल्के बाज़ तो फक़ीह बनें और बाज़ उनकी तक़लीद करें।
कल आगे......
*इमाम अपने हैं वोह तक़दीर वाले आदमी हैं हम,*
*हमें हैं फ़ख़्र ऐ तौह़िद उनके मुक्तादी हैं हम।*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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