तक़लीद का सबूत आयाते क़ुरआनिया और अह़ादीस व तफ़्सीर से

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*🥀 तक़लीद का सबूत आयाते क़ुरआनिया और अह़ादीस व तफ़्सीर से 🥀*



🔛² बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
तर्जमा: जिस दिन हम हर जमाअ़त को उसके इमाम के साथ बुलाएँगे।
*📚 सूरह बनी इसराईल' आयत 71*

इस आयत की तफ़्सीर में “तफ़्सीर रूहुल बयान में लिखा है: ये इमाम दीनी पेशवा है तो क़यामत में कहा जाएगा ऐ हनफि, ऐ शाफेई।

तर्जमा: और जो मोमिनों के ख़िलाफ़ राह चले हम उसको उसके रूख पर फेर देंगे, और जहन्नम में पहुँचाएँगे और वोह बुरा ठिकाना है।
*📚 सूरह निसा' आयत 115*

ग़ैर-मुक़ल्लिदों! बताओ ये ख़ुदा और रसूल ﷺ के ज़िक्र के साथ मो’मेनीन के ज़िक्र की क्या वजह है और फी ज़माना आम मो’मेनीन के खिलाफ कौन चल रहा है।

तर्जमा: ऐ ईमान वालों! अल्लाह से डरो और सच्चों के साथ रहो।
*📚 सूरह तौबा' आयत119*

और इसमें कोई शक नहीं के चारों इमाम सच्चे हैं।
लेहाज़ा जो उनके साथ है उनमें से किसी का मुक़ल्लिद है वोह सादक़ीन और सच्चों के साथ है।

ह़दीस: *📚 मुस्लिम शरीफ़' हिस्सा-1, बाब बयान इन्नददीन अन्नसीहत”* में हज़रत तमीम दारी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया के दीन खैरख्वाही है अल्लाह और उसके रसूल के लिए और उसकी किताब के लिए और इमामों के लिए और आम मो’मेनीन के लिए।
*📚 सही मुस्लिम शरीफ़ जिल्द 1, पेज़ नं 54*

इस हदीस की शरह में इमाम नववी रहमतुल्लाहि अ़लैहि' फ़रमाते हैं: ये ह़दीस उन इमामों को भी शामिल है जो ओलमाए दीन हैं और उलमा की खैरख्वाही ये है कि उनकी रिवायत कर्दा अह़ादीस को क़ुबूल किया जाए और अह़कामे दीनया में उनकी तक़लीद की जाए।

ह़दीस: *📚 तफ़्सीर दुर्रे मन्सूर”* में हज़रत अनस इब्ने मालिक रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' से मरवी है रसूले पाक ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया के आदमी नमाज़ व रोज़ा व हज अदा करने और जेहाद करने के बावजूद मुनाफ़िक़ होता है।
अर्ज़ किया गया क्यों।🤔
फ़रमाया अपने इमाम पर ता’नाज़नी की वजह से इमाम कौन है वह फ़रमाया रब ने *فاسنلوا الایۃ* या’नी इमाम से मुराद अहले इ़ल्म हैं।

ह़दीस: *📚 मिश्कात शरीफ़' बाबुल फराईज पेज़ 264)* में बरिवायत बुखारी है की हज़रत अबु मूसा अश्-अ़री रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' ने हज़रत अ़ब्दुल्लाह इब्ने मस्ऊ़द रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' के बारे में फ़रमाया के لاتسنلوانی مادام ھذا الحبرفیکم या’नी जब तक तुममें इब्ने मस्ऊ़द जैसा ज़ी इ़ल्म मौजूद है तुम मुझसे कुछ न पूछो।

*तक़लीद शख़्सी का इससे बढ़कर सबूत और क्या होगा।*
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हज़रत अबू मूसा अश्-अ़री रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' ने ये नहीं कहा के सिर्फ क़ुरआन व हदीस देखो ये भी न कहा के जिससे चाहो उससे पूछो बल्के फ़रमाया के सिर्फ़ इब्ने मस्ऊ़द रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से पूछो यही तो तक़लीदे शख़्सी का मफहूम है।

ह़दीस: *📚 मिश्कात शरीफ़' पेज़ 35* बरिवायत तिर्मिज़ी शरीफ़' अबू दाऊद, इब्ने माजा, बैहक़ी की हदीस है अल्लाह जलालुहू' उस बन्दे को खुश रखे जिसने मेरी हदीस अच्छी तरह याद रखी और दूसरों तक पहुँचाई और बहुत से लोग वह हैं कि आयत व अह़ादीस उन्हें याद हैं लेकिन वह उन्हें पूरी तरह समझते नहीं, और बहुत से लोग अपने से ज़्यादा समझने वालों को पहुँचा देते हैं।

ग़ैर-मुक़ल्लिदों! ठण्डे दिल से सोचो और बताओ हुज़ूर अकरम ﷺ का ये फ़रमाने आलीशान क्या इस बात का सबूत नहीं है कि अह़ादीस को याद कर लेने रट लेने और उनकी गहराई तक पहुँचने में बड़ा फ़र्क है।
अगर आपके दिल में जरा भी ख़ौफ़े ख़ुदा रह गया है तो हमारी पेशकर्दा इस हदीस को पढ़कर आप ज़रूर इक़रार करेंगे के अह़ादीस को समझना हर शख़्स के बस की बात नहीं और बिना अक़्ल पर ज़ोर दिए ये बात भी वाज़ेह है कि जो खुद नहीं समझ सकते वह यक़ीनन अहले इ़ल्म व फ़िक़ह की तक़लीद करेंगे? न के यूँ ही अन्धेरे में लाठी चलाएँगे।

तअ़ज्जुब की बात है की जमाअ़ते अहले हदीस का हर फ़र्द तो ख़्वाह वो दुकानदार हो या किसान खुद को मुह़द्दिस समझता है और माँ के पेट से मुज्ताहिद पैदा होता है और सह़ाबी-ए रसूल सय्यिदुना अबु मूसा अश्-अ़री रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु' फ़रमाते हैं के मुझसे न मा’लूम करो बल्के जो मस्अ़ला पूछना हो वो इब्ने मस्ऊ़द रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से पूछो।

*📚 बुखारी व मुस्लिम शरीफ़' से मरवी मिश्कात शरीफ़' किताबुल इ़ल्म, पेज़ 32* पर हदीस है हुज़ूर पुरनूर ﷺ फ़रमाते हैं के अल्लाह तआ़ला' जिसके साथ खैर का इरादा फ़रमाता है उसको दीन के मुआमले में तफक्क़ोह और सूझ बूझ अता फ़रमाता है और देता है ख़ुदा, लेकिन बाँटने वाला मैं हूँ।

ये ह़दीस भी खुले तौर पर बता रही है की दीन में सूझ बूझ हर एक को नहीं मिलती बल्के वह खास नेअमते इलाहिया है जो अपने खास बन्दों को बवसीला नबी करीम ﷺ अता फ़रमाता है हर कस व नाकस को नहीं मिलती।
लेहाज़ा उनके लिए तक़लीद के सिवा चाराए कार नहीं।
*📚 तक़लीदे शख़्सी ज़रूरी है' पेज़ नं 65/72*

*मुक़ल्लिद ग़ैर है जो आज भी फ़ितने उठाते हैं।*
*गलत कल भी बताते थे गलत अब भी बताते हैं।*
*बताई राह जो हज़रत ने हम उससे गुजरते हैं।*
*ख़ुदा का फ़ज़ल है हम आपकी तक़लीद करते हैं।*



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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*

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